छत्तीसगढ़

राखड़ माफियाओं का कहर : जगह-जगह राखड़ डंप कर अपनी जेब गरम कर रहे राखड़ के सौदागर, तालाबों को भी राखड़ से पाटने का चल रहा खेला, जनप्रतिनिधियों से लाखों में सौदा किए जाने की खबर!

वातावरण हो रहा जहरीला, सैकड़ों एकड़ जमीन हो जाएगी बंजर,

आखिर जिला प्रशासन क्यों है मौन?

सक्ती। जिले में इन दिनों देर रात राखड़ डंप करने का खेला शुरू हो चुका है। मुख्य मार्ग में कई स्थानों पर जगह-जगह राखड़ डंप कर दिया गया है। राखड़ माफिया अब जिले के तालाबों को भी नहीं बख्श रहे हैं। शहरी व ग्रामीण अंचलों में कुछ जनप्रतिनिधियों के साथ इन राखड़ माफियाओं द्वारा सांठगांठ कर जिले के तालाबों को पाटने लाखों का सौदा किए जाने की खबर सरगर्म है।

सक्ती जिले में राखड़ माफियाओं का कहर दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। मोटी कमाई की लालच में ये राखड़ के सौदागर रोजाना सैकड़ों ट्रक राखड़ जिला मुख्यालय के आसपास डाल रहे हैं। भारी मात्रा में राखड़ के डाले जाने से आसपास का वातावरण जहरीला तो हो ही रहा है, साथ ही सैकड़ों एकड़ जमीन के जल्द ही बंजर होने की संभावना बनी हुई है।

राखड़ माफिया बेलगाम

जिले के राखड़ माफिया पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं। अब वे सरकारी जमीनों को भी नहीं बख्श रहे हैं। मगर हैरत की बात यह है कि सब कुछ देखकर भी जिला प्रशासन खामोश है। रोजाना प्लांट से निकलने वाले हानिकारक सैकड़ों ट्रक राखड़ डंप किए जा रहे है, मगर अधिकारियों की उदासीनता से इन राखड़ के सौदागरों के हौसले बढ़ा दिए हैं.

सक्ती जिले के दो पावर प्लांटों से निकलने वाले राखड़ किए जा रहे डंप

सक्ती जिले के दो बड़े पावर प्लांटों से भारी मात्रा में राखड़ जिले में नियम विरुद्ध डिस्पोज किये जा रहे हैं। इन दो प्लांटों से राखड़ माफिया रोजाना सैकड़ों ट्रक राखड़ क्षेत्र के रिहायशी इलाकों में खपा रहे हैं। खबर है कि राखड़ खपाने के लिए इन्हे प्लांटों से प्रति टन अच्छी खासी रकम मिल रही है, जिसके लिए ये राखड़ के सौदागर जिले में जगह-जगह राखड़ डालकर अपनी जेब गरम कर रहे हैं, मगर जिले के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले में आखिर क्यों मौन है, यह समझ से परे है।

रायगढ़ के एसकेएस कंपनी से भी आ रहा राखड़

रायगढ़ जिले की एसकेएस बिजली उत्पादन कंपनी से भी भारी मात्रा में राखड सक्ती में डंप किया जा रहा है। कुछ दिन पूर्व सक्ती के बेलाचुवा में नहर किनारे सरपंच के कहने पर भारी मात्रा में राखड डंप किया गया है जो एसकेएस कंपनी का बताया जा रहा है इससे पहले सक्ती जिले के दो पावर प्लांटों ने यहां के वातावरण को जहरीला बनाने का ठेका ले रखा था, लेकिन अब इस काम में कुछ और कंपनियां हाथ में हाथ मिलाकर जिले को राखड़मय बनाने के काम में जुट गई हैं।

तालाबों के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट के बादल

इन दिनो जिले के तालाबों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ये राखड़ माफियाओं जिले के जनप्रतिनिधियों से लाखों का सौदा करके राखड़ तालाबों में डंप करने लगे हैं। बहुत जल्द इन तालाबों का अस्तित्व मिटने लगेगा, इस बात पर कोई संदेह नहीं है, परंतु यदि इसी तरह राखड़ माफियाओं द्वारा लगातार जिले में राखड़ डंप का सिलसिला चलता रहा तो इसका जहर पूरे वातावरण में फैल जाएगा। सक्ती जिले में कई ऐसे तालाब हैं जिसे राखड के सौदागरों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से लेन देन कर राखड़ से पाट दिया है। इसमें सक्ती बाराद्वार मुख्यमार्ग स्थित सकरेली गांव का एक तालाब भी शामिल है, वही देवरमाल गांव के एक तालाब का भी जल्द अस्तित्व मिटने के कगार है। सक्ती के बेलाचुवा में नहर किनारे भारी मात्रा में राखड डंप किया गया है इन सभी जगहों पर वहां के जनप्रतिनिधि सरपंच सचिव के संलिप्त होने की खबर है, जबकि विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में होने के बावजूद चुनाव का हवाला देकर जिम्मेदार अधिकारी मामले की लीपापोती में जुटे हुए हैं।

Related Articles