छत्तीसगढ़

शिवजी के अनन्य भक्त डोंगिया सुलोनी वाले गबेल परिवार ने घर में किया रूद्राभिषेक, ब्राह्मणों को कराया गया भोजन

सक्ती। श्रावणी मास के पावन मौके पर शिवजी के अनन्य भक्त डोंगिया सुलोनी वाले गबेल परिवार के सदस्यों के द्वारा अपने निवास में रूद्राभिषेक कर शिवजी की पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर सभी ब्राह्मणों को दक्षिणा भेंट कर उनका चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेकर उन्हें भोजन भी कराया गया।

भाजपा नेता एवं जनपद सदस्य रामकुमार गबेल एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गीता गबेल ने अपने निवास पर शिव जी के रुद्राभिषेक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर जहां उपस्थित विद्वान पंडितों ने भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक विधिवत पूजा- अर्चना के साथ संपन्न कराया, तो वही पूजा अर्चना के पश्चात डोंगिया सुलोनी वाले गबेल परिवार द्वारा उपस्थित सभी विद्वान पंडितों के चरण धोकर उनसे आशीर्वाद लिया गया एवं उन्हें भोजन भी कराया गया तथा भोजन के पश्चात रामकुमार गबेल एवं श्रीमती गीता गबेल ने सभी ब्राह्मणों को दक्षिणा स्वरूप भेंट अर्पित की एवं उनके चरण स्पर्श किये, इस दौरान डोंगिया सुलोनी वाले गबेल परिवार के सभी वरिष्ठ सदस्य, महिला सदस्य एवं बच्चे भी उपस्थित रहे। इस संबंध में रामकुमार गबेल ने कहा कि भगवान भोलेनाथ की आराधना से ही जहां सभी संकटों का निवारण होता है तो वही वे विगत कई वर्षों से निरंतर बाबा बैजनाथ धाम की भी कावड़ यात्रा करते हैं, एवं उनका सौभाग्य है कि उन्हें शिवजी की आराधना का अवसर मिला है।

शिवजी को रुद्राभिषेक बहुत प्रिय

मान्यता है कि शिव के रुद्र रूप को रुद्राभिषेक बहुत प्रिय है। भगवान भोलेनाथ का सावन में रुद्राभिषेक करने से इंसान के सांसारिक कष्ट दूर हो जाते हैं और ग्रह दोषों से भी मुक्ति मिल जाती है। आइए जानते हैं भगवान भोलेनाथ का किन वस्तुओं से रुद्राभिषेक किया जाता है।

घर पर रुद्राभिषेक का विधान

भगवान शंकर के रुद्राभिषेक की महिमा लगभग सभी धार्मिक ग्रंथों में बताई गई है। कहते हैं कि रुद्राभिषेक करने से आपकी एक-दो नही बल्कि 18-18 प्रकार की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। दिन सोमवार का हो, प्रदोष का हो, शिवरात्रि का हो या फिर सावन का, शिव की सभी मान्य तिथियों में शिव का रुद्राभिषेक जन्म जन्मांतर के पापों को काट कर मोक्ष दिलाने में फलदायी होता है।

ज्योतिर्लिंग पर रुद्राभिषेक करना भी फलदायी

किसी ज्योतिर्लिंग पर रुद्राभिषेक करना सबसे उत्तम माना गया है। अपने आस-पास मंदिर के शिवलिंग पर रुद्राभिषेक किया जा सकता है। इसके अलावा घर में स्थापित शिवलिंग पर भी रुद्राभिषेक किया जा सकता है। शिवलिंग न होने की स्थिति में हम अंगूठे को शिवलिंग मानकर उसका अभिषेक कर सकते हैं। वैसे तो रुद्राभिषेक के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग को माना गया है।

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