छत्तीसगढ़

नगर के गौ सेवकों ने प्रसव पीड़ा से तड़प रही गौमाता का कराया सफल ऑपरेशन, बचाई गई जान

बाराद्वार। नगर के गौ सेवकों की मदद से प्रसव पीड़ा से तड़प रही गौ माता का पशु चिकित्सकों द्वारा सफलतापूर्वक आपरेशन कर गाय को बचा लिया गया, लेकिन उसके बछड़े को बचाया नहीं जा सका है। फिलहाल श्रीराम कृष्णा गौशाला में गौमाता की देखभाल की जा रही है और वह बिल्कुल स्वस्थ्य है।

जानकारी के मुताबिक बाराद्वार के श्रीराम कृष्णा गौशाला में सैकड़ों की संख्या में गोवंश की देखभाल के अलावा समय समय पर उनके लिए चारा, पानी आदि की व्यवस्था की जाती है। लगभग 6 माह पूर्व सडक़ दुर्घटना में घायल एक गौमाता का गौ सेवकों द्वारा उपचार कराये जाने के बाद श्रीराम कृष्णा गौशाला में उसकी देखरेख की जा रही थी। कुछ दिनों पूर्व उसे प्रसव पीड़ा हुई और वह दर्द से तड़पने लगी। निश्चित समयान्तराल में प्रसव नहीं होने से तड़पती गौ माता की हालत देखकर गौ सेवकों ने तत्काल चिकित्सकीय मदद ली। मौैके पर पहुंची चिकित्सकों की टीम ने गौमाता का उपचार प्रारंभ किया।

चिकित्सकीय टीम में शामिल डॉ जैनेन्द्र खुंटे पशु चिकित्सा अधिकारी डभरा, गंगाधर रात्रे एवीएफओ, पुष्पेंद्र लहरे वीएफओ और नितेश जांगड़े एवीएफओ ने बताया कि गौमाता के साथ हुई दुर्घटना के कारण उसका हिप बोन चपटा हो गया है। इसकी वजह से उसका सिजेरियन आपरेशन करना जरूरी है। चिकित्सकों के अथक प्रयास से प्रसव पीड़ा से तड़प रही गौ माता का सफलतापूर्वक ऑपरेशन तो हो गया, लेकिन गाय के बच्चे को बचाया नहीं जा सका। फिलहाल गौमाता सुरक्षित और स्वस्थ्य बताई जा रही है।

इस सराहनीय कार्य में गौ सेवक राजशेखर शर्मा, मयंक सिंह, राजा राठौर, शुभ सिंघानिया, संस्कार गुप्ता, देव वैष्णव, रोहित, श्रीयक तिवारी, अमन अग्रवाल, गोलू अग्रवाल , अनुराग चौबे समेत पूरी गौ सेवा समिति बाराद्वार का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

गौरतलब रहे कि इन गौ सेवकों द्वारा हर संभव सहयोग कर गाय की देखभाल की जाती रही है। गौ सेवकों ने मिलकर गौमाता की जितनी सेवा की, उसकी जितनी भी तारीफ की जाए, वह कम है। कहते हैं ‘हर जीव में परमात्मा का अंश होता है’, इसे दृष्टिगत रखते हुए नगर के गौ सेवकों द्वारा जिस तरह दिन रात गौ माता की सेवा की जा रही है, उसकी लोगों द्वारा जमकर सराहना की जा रही है।

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