छत्तीसगढ़

श्रावण मास के पहले सोमवार को शिवालयों में लगी भक्तों की कतार, हर हर महादेव के जयघोष से गूंज उठे शिवालय

सक्ती। सावन के पहले सोमवार पर आज जिले के सभी शिव मंदिरो में आस्था का सैलाब उमड़ा। भोलेनाथ का दर्शन पाने शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की कतार लगी रही। जिले के सभी शिवालयों में हर हर महादेव और बोल बम के जयघोष गुंजायमान होते रहे। ‘हर-हर, बम-बम’ के जयघोष से गूंजती कांवरियों और श्रद्धालुओं की टोली लगातार शिवालयों की ओर बढ़ती रही। तुर्रीधाम में भी भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए दौड़ते, झूमते, गाते, नाचते भक्त और महादेव के जयकारे लगाते श्रद्धालु आस्था के पथ पर आगे बढ़ते नजर आए।

सावन का आरंभ तो चार जुलाई से ही हो गया, लेकिन मास का पहला सोमवार श्रद्धा की फुहार लेकर आया। श्रावण मास के पहले दिन हर हर महादेव के जयघोष से शिवालय गूंज उठे। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से जलाभिषेक किया। ओम नम: शिवाय और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच लोगों ने भोले भंडारी को प्रिय सामग्री चढ़ाकर स्तुति की। शिवालयों के बाहर एवं परिसर में पूजन सामग्री की दुकानें भी सजी रहीं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मुख्य मंदिरों के बाहर पुख्ता इंतजाम किए गए थे। जिले के शिवालयों में सुबह से ही जलाभिषेक और दर्शन-पूजन का क्रम जारी रहा।

सक्ती के पावन धरा तुर्रीधाम में सावन के पहले सोमवार को भक्तों की अपार भीड़ देखी गई।

सक्ती के सेढ़ू शिव मंदिर, पुराना धर्मशाला शिव मंदिर, बरगढ़ शिव मंदिर में सुबह से ही पूजा अर्चना करने वालों की भीड़ लगी रही। सबसे ज्यादा भक्त तुर्रीधाम स्थित शिव मंदिर में दिखाई दिए। यहां के पुजारी ने बताया कि आराधना के लिए भोर में ही मंदिर के द्वार खोल दिए गए थे। सावन को देखते हुए मंदिर परिसर की सफाई भी पहले ही करा ली गई थी। शिवालयों में जल चढ़ाने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कांवर लिए बोल बम और हर – हर महादेव के जयकारों के साथ नदियों से जल लेकर पैदल यात्रा कर तुर्रीधाम पहुंचे और शिवलिंग में जल चढ़ाया।

जलाभिषेक कर सबके मंगल की कामना

सावन माह के प्रथम दिन नगर सहित क्षेत्र के अनेक शिव मंदिरों में शिव भक्त पुरुषों और महिलाओं ने पहुंचकर जलाभिषेक कर आशीर्वाद लिया। लोगों ने विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा कर मंगल की कामना की। सुबह से ही शिव मंदिरों में भक्तों ने बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि शिवलिंग पर अर्पण कर जलाभिषेक किया और सबके मंगल की कामना की। लोगों ने बेलपत्र, गुड़, भांग चढ़ाकर जलाभिषेक किया। मंदिरों में भजन – कीर्तन का दौर पूरे दिन चलता रहा। महादेव के जयकारों और बोल बम के नारे से मंदिर गूंज उठा। खरौद के लक्ष्मणेश्वर मंदिर, पीथमपुर के कलेश्वरनाथ मंदिर, तुर्रीधाम के शिव मंदिर, जांजगीर के सेंधवार महादेव, चंदनियापारा स्थित शिव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।

इस शिवालय में हर समय प्रकृति करती है महादेव का जलाभिषेक

सक्ती के पावन धरा तुर्रीधाम शिवभक्तों के लिए अत्यंत ही पूजनीय है. यहां श्रद्धालु बारहों मास आते हैं, लेकिन सावन महीने में अधिक संख्या में शिव भक्त अपनी मनोकामना लेकर तुर्रीधाम पहुंचते है. सावन के पहले सोमवार को भी यहां भक्तों की अपार भीड़ देखी गई। शिव भक्तों ने शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि अर्पण किया। स्थानीय दृष्टिकोण से यहाँ उपस्थित शिवलिंग, प्रमुख ज्योतिर्लिंगों के समान ही वंदनीय है.मंदिर के निर्माण संबंधित जानकारी देते हुए पुजारी ने बताया कि इसका निर्माण स्थानीय राजा-रानी द्वारा कराया गया था। यह किस राजा के शासन में निर्मित हुआ यह अज्ञात है। इसका जीर्णोद्धार 3-4 पीढिय़ों से किया जा रहा है। वर्तमान में यह मंदिर का पूर्णत: आधुनिक स्वरूप में आ गया है। इस मंदिर का स्थापत्य अनोखा है। यह शिवलिंग पूर्वाभिमुख है। इसके चारों ओर मंडप बनाया गया है। गर्भगृह मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से 8 फिट की गहराई पर है. गर्भगृह पहुँचने हेतु नीचे की ओर होती हुई सीढिय़ाँ बनी हुई है। इस तुर्रीधाम की प्रमुख विशेषता यह है कि इसके गर्भगृह में एक प्राकृतिक जलस्त्रोत जो निरंतर शिवलिंग पर गिरते रहता है जिसे स्थानीय भाषा में तुर्री (निरंतर)कहते है। विद्यमान है। यह जल स्त्रोत अनादि काल से अनवरत बहता हुआ आ रहा है। इसी जलस्रोत के नीचे ही प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जिस पर सदैव ही प्राकृतिक रूप से शिवलिंग पर जल अभिषेक होता रहता है।

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