छत्तीसगढ़

ओह माई गॉड! विद्यालय में बच्चों की फर्जी उपस्थिति दिखाकर कर दी गई घपलेबाजी, शिकायत मिलने के उपरांत शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर जांच प्रतिवेदन पेश

मध्यान्ह भोजन योजना में वित्तीय अनियमितता का मामला उजागर

सक्ती। जो व्यक्ति अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है, उसे गुरु कहते हैं। गुरु, हमारे जीवन में प्रकाश फैलाता है और आत्मिक उन्नति के लिए सही रास्ता दिखाता है, शिक्षण के माध्यम से छात्रों को ज्ञान, योग्यता या गुण प्राप्त करने में मदद करने का दायित्व होता है गुरूओं का, लेकिन यदि शिक्षा के मंदिर में गुरूजनों द्वारा बच्चों को दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन (पौष्टिक आहार) की राशि में ही घपलेबाजी कर दी जाए तो इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है? ताजा मामला स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय कसेरपारा सक्ती जिला सक्ती के प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला का है, जहां विद्यालय में बच्चों की फर्जी उपस्थिति दिखाकर मध्यान्ह भोजन की राशि में घपलेबाजी की शिकायत मिलने पर गहन जांच उपरांत प्रतिवेदन तैयार कर उसे जिला शिक्षा अधिकारी को सौंप दिया गया है।

जानकारी के अनुसार श्रीमती रीता पटेल द्वारा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय कसेरपारा सक्ती जिला सक्ती के प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला में जुलाई 2022 से बच्चों को दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन में गड़बड़ी के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी को दिनांक 07.06.2024 को शिकायत पत्र सौंपा गया था। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा दिए गए निर्देश के आधार पर जांच अधिकारी सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती नीलिमा बडग़े ने दिनांक 10.07.2024 को संबंधित शाला के मध्यान्ह भोजन पंजी एवं छात्र उपस्थिति पंजी की जांच की तो पाया कि बच्चों की फर्जी उपस्थिति दिखाकर मध्यान्ह भोजन की राशि में घपलेबाजी की गई है, क्योंकि बालकान पंजी में उपस्थिति की संख्या और मध्यान्ह भोजन पंजी में उपस्थिति की संख्या में काफी अंतर देखने को मिला। दिनांक 01 सितम्बर 2022 को कक्षा पहली में बच्चों की उपस्थिति 15 वहीं मध्यान्ह भोजन पंजी में उपस्थिति 18 दर्शायी गई है। इसी तरह कक्षा दूसरी में बच्चों की उपस्थिति 16 जबकि भोजन पंजी में 22 दर्शायी गई है। पूरे रिकार्ड में लगभग इसी तरह की घपलेबाजी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।

विदित रहे कि भारत सरकार द्वारा संचालित मिड डे मिल की योजना के मुताबिक शिक्षक मिड-डे मील नहीं खा सकते। स्कूल में यदि कोई विद्यार्थी उपस्थित नहीं है तो खाना नहीं बनाया जा सकता है। यदि एक भी विद्यार्थी स्कूल में हो तो उसके लिए मिड-डे मील बनाना पड़ेगा।

श्रीमती नीलिमा बडग़े ने जांच उपरांत प्रतिवेदन तैयार कर जिला शिक्षा अधिकारी को सौंप दिया है, जिसमें प्राथमिक शाला प्रभारी प्रधान पाठिका कुमारी भारती देवांगन एवं पूर्व माध्यमिक शाला प्रभारी प्रधान पाठिका श्रीमती शमीम खान के द्वारा व्यक्तिगत आर्थिक लाभ हेतु मध्यान्ह भोजन योजना में वित्तीय अनियमितता किए जाने का उल्लेख किया गया है।

गौरतलब रहे कि मिड डे मील योजना प्राथमिक विद्यालय के छात्रों को मुफ़्त भोजन प्रदान करती है। इसका उद्देश्य स्कूल में उपस्थिति बढ़ाना, कक्षा में भूख को कम करना और छात्रों के समग्र स्वास्थ्य और पोषण में सुधार करना है। यह योजना स्कूल के दिनों में बच्चों को गर्म, पौष्टिक भोजन देकर संचालित होती है। इस योजना के तहत गरीब और छोटे तमके के परिवार को बहुत ही अधिक फायदा पहुंचा। इस योजना के कारण बहुत से माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने लगे। योजना के तहत स्कूल में बच्चों की उपस्थिति अधिक बढ़ गयी। इस योजना के लाभ के लिए विद्यालयों में लड़कियों की उपस्थिति में काफी इजाफा देखा गया। इस योजना के कारण बच्चों में स्कूल जाने के लिए ज्यादा रूचि दिखने लगे। यह योजना बच्चों के बौद्धिक और विकास में काफी सहायक सिद्ध हुआ। सामाजिक एकता को प्रोत्साहन मिला और सामाजिक भिन्नताये कम होने लगी। इसके तहत बच्चों में अच्छी सोच और आदतों का विकास हुआ। मिड डे मिल योजना के तहत हमें देश के साक्षरता दर में बढ़ावा देखने को मिला, बावजूद इसके मध्यान्ह राशि में घपलेबाजी करते समय इनके हाथ तक नहीं कांपे, दिल भी नहीं पसीजा और बिना किसी डर-भय के वे भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे रहे। देखना होगा कि सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत लगभग दो दशक पूर्व शुरू हुई भारत सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को ठेंगा दिखाने वालों के विरूद्ध कब तक कार्रवाई होती है?

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