छत्तीसगढ़

आरक्षण के मुद्दे पर भारत बंद का दिखा मिला-जुला असर…जुलसू निकालकर अग्रसेन चौक में एसडीएम को सौंपा गया ज्ञापन

सक्ती। दलित और आदिवासी संगठनों ने हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए मजबूत प्रतिनिधित्व और सुरक्षा की मांग को लेकर आज भारत बंद का आह्वान किया, जिसका बसपा, आरजेडी और चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी समेत कई दलों ने समर्थन भी किया। जिले में इसका मिला-जुला असर देखने को मिला।

विदित रहे कि एससी-एसटी के आरक्षण में क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आज देशभर के 21 संगठनों ने भारत बंद बुलाया था। पूरे जिले में इसका मिला-जुला असर नजर आया। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने यह फैसला लिया था। इसी कड़ी में सक्ती जिले में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने जुलूस निकाली जो अग्रसेन चौक में जाकर समाप्त हुआ। यहां एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा गया। भारत बंद के फैसले को देखते हुए कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले में चाक चौबंद व्यवस्था की गई थी।

भारत बंद बुलाने वालों की है ये मांग

संगठन ने हाल में सुप्रीम कोर्ट की सात न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुनाए गए फैसले के प्रति विपरीत दृष्टिकोण अपनाया है, जो उनके अनुसार, ऐतिहासिक इंदिरा साहनी मामले में नौ न्यायाधीशों की पीठ द्वारा लिए गए फैसले को कमजोर करता है, जिसने भारत में आरक्षण की रूपरेखा स्थापित की थी। एनएसीडीएओआर ने सरकार से अनुरोध किया है कि इस फैसले को खारिज किया जाए क्योंकि यह अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों के लिए खतरा है। संगठन एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण पर संसद द्वारा एक नये कानून को पारित करने की भी मांग कर रहा है जिसे संविधान की नौवीं सूची में समावेश के साथ संरक्षित किया जाए।

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