छत्तीसगढ़

शहर में गुलाबी ठंड ने दी दस्तक, निकल गए स्वेटर और रजाई, सुबह-सबेरे सैर-सपाटे पर निकल रहे लोग

सक्ती। शहर में गुलाब ठंड ने दस्तक दे दी है। सुबह और रात के समय ठंड लगने लगी है। मौसम का पार लुढ़कने से लोगों को ठंड का एहसास होने लगा है। ठंड बढ़ते ही अब लोग गर्म कपड़े बाहर निकालने को मजबूर दिख रहे हैं। बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के कारण ठंड में वृद्धि हुई है।

ठंड के बढ़ते ही लोग स्वेटर और रजाई बाहर निकालने को मजबूर हो गए हैं, वहीं सुबह की पहल किरण के साथ लोग मॉर्निंग वाक पर निकलने लगे हैं। शहर के मुख्य मार्ग में अलसुबह से ही मार्निंग वॉक पर निकले लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है, वहीं अब रात में पंखा, कूलर या एसी चलाने की जरूरत तो महसूस होती ही नहीं है, लोगों को ऊलेन चादर या कंबल तानकर सोना पड़ रहा है। ठंडे पानी से लोग परहेज करने लगे हैं, जबकि गर्म-गर्म भोजन ही अच्छा लगने लगा है, वहीं ठंडा पानी पीना या ठंडे पानी से नहाने से लोग कतराने लगे हैं। वे इसके लिए भी गुनगुने पानी का ही इस्तेमाल शुरू कर दिए हैं। अब लोगों को तीखी लगने वाली धूप भी प्यारी लगने लगी है। सुबह-शाम लोग शरीर पर स्वेटर, कार्डिगन और चादर ढकने के लिए विवश हो रहे हैं, वहीं दिन में धूप के सेवन से लोग चूक नहीं रहे हैं।

स्कूल जिंदल वर्ल्ड सक्ती के डायरेक्टर रवि जिंदल नियमित करते हैं योगाभ्यास

स्कूल जिंदल वर्ल्ड सक्ती के डायरेक्टर रवि जिंदल (बंटी) ने बताया कि योग के नियमित अभ्यास से कई स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं, जिसमें हृदय संबंधी स्वास्थ्य में वृद्धि, मांसपेशियों की ताकत में सुधार और रक्तचाप का सामान्य होना शामिल है। योग तनाव के लिए एक प्रसिद्ध मारक है और बेहतर नींद पैटर्न को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि वे नियमित रूप से अपने मित्रों चमन (डीएम), नरेश मित्तल, दिनेश (मुन्ना) के साथ प्रतिदिन जिंदल वर्ल्ड स्कूल में गुलाबी ठंड का सुखद आनंद लेते हुए योगा करते है।

सूती की जगह टंग गए ऊनी कपड़े

कल तक बाजार के जिस दुकान में सूती के कपड़े को शो में लगाये जाते थे या काउंटर में गर्मी के हल्के-फुल्के कपड़ों का स्टॉक रखा जा रहा था, उसकी सूरत भी बिल्कुल बदल गई है। सूती कपड़ों की जगह ऊनी कपड़ों ने ले ली है। अलग-अलग ब्रांडों के ऊलेन स्वेटर, कार्डिगन, मफलर, स्कार्फ, कोट व शॉल लोगों को लुभाने लगे हैं। इसके अलावा दुकानदारों ने इनर-वियर का भी स्टॉक करना शुरू कर दिया है। बाजार के खाली जगहों पर रूई धुनने की मधुर आवाज भी आने लगी है जो ठंड के लिए रजाई बनने के संकेत दे रहे हैं। जूते-मोजे की दुकानों पर भी लोग पहुंचने लगे हैं। शहर के एक दुकानदार ने बताया कि ठंड को देखते हुए नये डिजायनों में स्वेटर, कोट, बंडी, कंबल व शॉल का पर्याप्त स्टॉक किया गया है, लोग आने भी लगे हैं। दर्जी के यहां भी कोट बनवाने वालों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है।

आइस्क्रीम से दूरी और नॉनवेज से करीबी

अब कोल्डड्रिंक, आइस्क्रीम, लस्सी, दही या फ्रिज में रखकर बेची जाने वाले खाद्य पदार्थों से लोग दूर होने लगे हैं. कहते हैं कि ठंड में ऐसे चीजों का उपयोग स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं हैं। सर्दी-खांसी के अलावे कोल्ड एटैक का खतरा बन जाता है। इन चीजों की जगह अब चाय, कॉफी और गर्म दूध ने ले ली है बाजार में चाय की दुकानों पर भी दिनभर भीड़ लगनी शुरू हो गई है हालांकि नॉन वेजिटेरियन के टेस्ट को देखते हुए बाजार में जगह-जगह अंडे के काउंटर खुल गए हैं। जहां ब्वॉयल, आमलेट, पोच, भुर्जी, टोस्ट बिकने लगे हैं। इसी तरह रेस्टोरेंट में भी मटन, चिकन, अंडा के वेरायटी की लिस्ट लग गई है। शहर के एक अंडा व्यवसायी ने बताया कि वैसे तो वे सालों भी अंडे के आयटम का ठेला लगाते हैं, लेकिन ठंड के दस्तक देते ही बिक्री में इजाफा होना शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि आधे नवंबर के बाद से ही रोजाना 20 से 25 कार्टून अंडा बिकना शुरू हो गया है।

अब देर से आती और जल्द चली जाती है ठंड

पहले बच्चों को पढ़ाया जाता था कि साल में चार ऋतुएं होती है. गर्मी, जाड़ा, बसंत और बरसात। प्रत्येक ऋतु की अवधि तीन-तीन माह की बतायी जाती थी, लेकिन बीते डेढ़-दो दशक से ऋतुओं के आने और जाने में बड़ा बदलाव हो गया है। एक तो इसकी अवधि तीन माह की नहीं रही, दूसरी ठंड की अवधि लगातार सिमटती जा रही है. पर्यावरण असंतुलित होने के कारण गर्मी की अवधि में लगातार विस्तार होता जा रहा है और ठंड की अवधि घटती जा रही है. पहले अक्टूबर माह से ही ठंड का आगमन हो जाता था। स्वेटर, रजाई-कंबल निकल जाते थे, लेकिन अब आधे नवंबर के बाद ठंड का एहसास ही शुरू होता है। अब ठंड मुश्किल से एक से डेढ़ महीने का रहने लगा है। शीतलहर की अवधि भी बमुश्किल 10 से 12 दिनों की होने लगी है। यह सिर्फ भारत की ही नहीं, वैश्विक चिंता का विषय है।

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