छत्तीसगढ़

मां महामाया देवी मंदिर में उमड़ रही माता के भक्तों की भीड़, पूजा पंडालों में चहुंओर बह रही भक्ति की मंदाकिनी

नवरात्र पर्व पर सफाई की आस लिए निहार रहा मां महामाया देवी मंदिर का तालाब, नगर पालिका खामोश

सक्ती। शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन भक्तों ने मां के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा अर्चना की। भक्त फूलों से सजी पूजा की थाली, नारियल, श्रृंगार का सामान और धूप लिए महामाया देवी मंदिर में मां का दर्शन करने पहुंचे, जहां मां का भव्य रूप से श्रृंगार किया गया। यहां मंदिर में दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ माता दुर्गा व अन्य देवी देवताओं के गीत हर जगह गूंज रहे हैं। नवरात्र पर्व पर मां अपने नौ स्वरूपों में देवी मंदिरों में विराजमान होकर भक्तों की करूण पुकार सुनती भी हैं और मनोकामनाएं भी पूर्ण करती हैं, लेकिन कचरे और गंदगी से पटे महामाया मंदिर तालाब की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है, क्योंकि नगर पालिका और मंदिर प्रशासन गहरी निद्रा में लीन है।

सक्ती जिले में घर से लेकर दुर्गा मंदिर व पूजा पंडालों में चहुंओर भक्ति की मंदाकिनी बह रही है। पूजा पंडालों, मंदिरों एवं घरों में माता की आराधना के पश्चात श्रद्धालुओं ने धन- धान्य, सुख-समृद्धि एवं आत्मिक शांति के लिए मन्नतें मांगी। देर शाम दीप जलाने के लिए भक्तों का तांता शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में लगा रहा। सक्ती वासियों की आस्था का केंद्र मां महामाया देवी मंदिर में दिन भर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है, जहां भक्तों द्वारा मातारानी का कीर्तन भजन किया जा रहा है। मंदिर पहुंचकर श्रद्धालु माता के दरबार में दीप जलाकर, आरती करके मां से भक्त मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, वहीं सभी देवी मंदिर दीपों से जगमगाने लगे हैं। श्रद्धालुओं ने नवरात्र के पांचवें दिन व्रत रखकर मंदिरों में मां भगवती के दर्शन किए और पूजा अनुष्ठान में हिस्सा लिया, जहां माता रानी को नारियल, चुन्नी, श्रृंगार का सामान, फूल और रोली आदि अर्पित किए गए। इस दौरान मंदिरों समेत अन्य पूजा स्थलों पर या देवी सर्वभूतेषु: के उच्चारण से वातावरण भक्तिमय हो गया। मंदिरों में गूंजते दुर्गा माता के कर्णप्रिय भजनों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया है। मां महामाया देवी मंदिर के अलावा सक्ती के तमाम देवी मंदिरों में नवरात्रि के पहले दिन से ही भक्तों की भीड़ देखी जा रही है। सभी देवी मंदिरों में ज्योति कलश प्रज्जवलित किए गए हैं।

शहर में गरबा-डांडिया की धूम

नवरात्र के साथ-साथ गरबा की शुरुआत हो रही है। पूजा समितियां इस बार गरबा नृत्य का आयोजन कर रही हैं। इसके अलावा समाज की ओर से भी गरबा का आयोजन किया गया है। गरबा को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। मां महामाया देवी मंदिर के पुजारी (बैगा) गजराज सिदार ने बताया कि मां भगवती के पाचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा से उत्तम फल की प्राप्ति होती है। इस दिन सफ़ेद रंग पहनना शुभ माना जाता है. सफ़ेद रंग पवित्रता, शांति, और मासूमियत का प्रतीक है। माना जाता है कि सफ़ेद रंग पहनने से मन और आत्मा शुद्ध होती है। पुजारी ने बताया कि सक्ती जिला मुख्यालय से गुजरने वाले लगभग हर लोग यहां आते हैं और मां का दर्शन पूजन करने के बाद ही अपना आगे का कार्य करते हैं। शारदीय नवरात्र के मौके पर मां महामाया मंदिर में इस बार मां के दरबार में 924 घृत ज्योति कलश और 1624 तैल्य ज्योत कलश प्रज्जवलित किए गए हैं। मंदिर की विशेषता यह है यहां के पुजारी (जिन्हें बैगा के नाम से जाना जाता है) के पूर्वजों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी माता की सेवा की जाती रही है, वहीं प्रतिदिन श्रद्धालुओं द्वारा भोग-भण्डारे का आयोजन कर प्रसाद वितरण भी किया जाता है।

नवरात्र पर्व पर भी तालाब के पास कचरे का ढेर, नगर पालिका की कार्यशैली पर लग रहा प्रश्न चिन्ह

अंचल के ख्यातिलब्ध मां महामाया मंदिर के प्रति भक्तों की आस्था की गहराई का अहसास यहां लग रही भीड़ को देखकर लगाया जा सकता है, बावजूद इसके यहां मंदिर के निकट तालाब को जिस तरह गंदगी से पाट दिया गया है, उसे देखकर नगर पालिका की कुंभकरणी निद्रा और मंदिर समिति की घोर लापरवाही का अहसास अनायास ही होने लगता है। इसी तालाब में शहर के सभी पंडालों की दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन भी किया जाता है। यहां पचरी और तालाब के आसपास फैली गंदगी, कूड़े-कचरे के दिन प्रतिदिन हो रहे विस्तार को देखते हुए इसके निस्तार की सख्त आवश्यकता है, बशर्ते नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद से जागें, लेकिन नवरात्रि पर्व पर यदि इस ओर ध्यान नहीं दिया गया और फैली गंदगी को हटाने तत्काल कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों को लोगों का कोपभाजन भी बनना पड़ सकता है।

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