छत्तीसगढ़

कुंभकरणीय नींद से जागा स्वास्थ्य अमला, अस्पताल में अस्थाई विद्युत आपूर्ति हुई बहाल, मरीजों ने ली राहत की सांस

सक्ती। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सक्ती में लगभग 48 घंटे तक विद्युत व्यवस्था के बाधित रहने की खबर के प्रकाश में आने के बाद जिला कलेक्टर श्री तोपनो ने पहल करते हुए तत्काल इसे दुरूस्त करने का निर्देश दिया, जिसके बाद कुंभकरणीय नींद से जागे स्वास्थ्य अमले और बिजली विभाग के आपसी सामंजस्य के बाद अस्थाई रूप से अस्पताल में विद्युत आपूर्ति बहाल हो सकी है। दोपहर लगभग 2 बजे विद्युत आपूर्ति बहाल होने के बाद अस्पताल में दाखिल मरीजों एवं उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है।

गौरतलब रहे कि स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले दो दिनों से अंधेरा छाया हुआ था। वार्डों में मरीज एवं उनके परिजन बिजली गुल होने से पंखे और लाइट की समस्या से जूझते रहे। हॉस्पिटल में दो जनरेटर उपलब्ध होने की खबर है, लेकिन और दोनों जनरेटर खराब हैं, इसकी अब तक पुष्टि नहीं हो सकी है। अड़तालीस घंटे बाद जब मामले ने तूल पकड़ा तो विद्युत विभाग का मैदानी अमला एक बार फिर दल-बल के साथ विद्युत व्यवस्था बहाल करने में जुट गया। सबसे पहले यहां बबूल की झाडिय़ां काटी गई और मार्ग को अवरूद्ध करते मेडिकल कचरे के ढेर को हटाया गया, जिसके बाद दोपहर तक अस्पताल में विद्युत व्यवस्था बहाल हो सकी।

इस संबंध में विद्युत विभाग के जूनियर सुपरवाईजर मेलाराम निर्मलकर ने बताया कि झाडिय़ों को कटवाने के बाद केबल को देखा गया तो दोनों केबल ब्रस्ट थे। एक फेस नहीं जा रहा था, दो फेस जा रहा था। दोनों में बिजली चालू की गई है। भीतर से गए केबल में भी फाल्ट देखने को मिला। श्री निर्मलकर ने बताया कि यहां जल्द से जल्द स्थायी रूप से केबल लगाकर काम करना पड़ेगा तभी समस्या से पूरी तरह निजात मिल सकेगी। ऐसी स्थिति में कभी भी फिर से समस्या पैदा हो सकती है।

अस्पताल में लंबे समय से बिजली गुल होने की खबर मिलते ही जिले के कांगे्रसी नेता लामबंद हो गए और उन्होंने तत्काल नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत को अगवत कराया, जिसके बाद इस समस्या का ठोस समाधान निकालने की दिशा में प्रयास शुरू किया गया। जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष श्याम सुंदर अग्रवाल, अध्यक्ष त्रिलोकचंद जायसवाल, महबूब खान, पिंटू ठाकुर, गिरधर जायसवाल समेत कई राजनीतिक हस्तियों ने अस्पताल पहुंचकर हालात का जायजा भी लिया।

फिलहाल अस्पताल में अस्थाई रूप विद्युत व्यवस्था बहाल जरूर हुई है, लेकिन देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा इसे स्थायी करने की दिशा में कब तक निर्णायक कदम उठाया जाता है?

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