बिजली गुल-टेंशन फुल : बिजली की आंखमिचौली से नागरिक परेशान, छोटे व्यापारियों की बढ़ी परेशानी

सक्ती। सक्तीनगर में बिजली की आंखमिचौली से नागरिक परेशान हैं। दिन व रात में कई बार बिजली की आपूर्ति बंद हो जाती है। बिजली की आपूर्ति बार-बार बंद होने से विद्युत से चलने वाले उपकरण भी बंद हो जाते हैं, जिससे व्यवसाय ठप पड़ रहे हैं। बारिश हो या न हो, बावजूद इसके जब चाहे तब बिजली गुल हो जाती है। विद्युत सप्लाई सुचारू रूप से नहीं मिलने के साथ-साथ जिले के ग्रामीण अंचलों में लो वोल्टेज की समस्या भी बनी हुई है। अघोषित विद्युत कटौती के कारण छोटे बच्चों को अधिक परेशानी हो रही है, क्योंकि जितनी बारिश अब तक नहीं हुई है, उससे अधिक उमस बढ़ जाने से लोग बेचैन होने लगे हैं, वहीं एकाएक बिजली चली जाने से उपभोक्ताओं में रोष बढऩे लगा है।
जिले में इन दिनों बिना हवा-तूफान के ही लाईट गुल कर दी जा रही है। लोगों के बीच चर्चा सरगर्म रहती है कि आखिर लाइट क्यों काट दी गई। लाइट कब तक आएगी? बस इन्हीं सवालों का उत्तर तलाशते-तलाशते लोग पसीने में भीगते रहते हैं और विद्युत विभाग को कोसने से बाज नहीं आते। विद्युत विभाग की मनमानी का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां दिन हो या रात, किसी भी समय बिजली काट दी जाती है जिसके पुनर्बहाल होने की संभावना कई बार 72-72 घंटे तक नगण्य रहती है और गांव अंधेरे में डूबे रहते हंै।.
बिजली संकट के चलते आम जनजीवन के साथ उद्योग धंधे भी प्रभावित हो रहे हैं। छोटे व्यापारी बिजली पर आधारित विभिन्न लघु उद्योग चलाते हैं, वहीं इन दिनों जन सेवा केंद्रों, च्वाइस सेंटरों में लोग अपना काम लेकर पहुंच रहे हैं, उन्हें भी अघोषित विद्युत कटौती के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आंखमिचौली से आटा चक्की, वेल्डिंग, दाल मिल जैसे उद्योग व इलेक्ट्रॉनिक दुकान, कंप्यूटर सेंटर, फोटो स्टूडियो, दुकानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सेवा केंद्र, मोबाइल व कंप्यूटर सेंटर व इलेक्ट्रॉनिक सामानों के विक्रेताओं का धंधा बिजली पर निर्भर होता है। बिजली के अभाव में यह धंधे चौपट हो रहे हैं। इन व्यवसायियों का कहना है कि बिजली की अपेक्षा जनरेटर चलाने पर दोगुना खर्च आता है वहीं इसके लिए अतिरिक्त पैसे मांगे जाने पर लोग वापस होते जा रहे हैं। बिजली कटौती का असर उद्यमियों के साथ-साथ किसानों को भी भारी परेशानी हो रही है फसलों में पानी देना मुश्किल हो रहा है।




