
सक्ती। राजस्व पटवारी संघ जिला सक्ती ने सक्ती कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर संघ के विगत वर्षों के मांगों, समस्याओं एवं आनलाईन भुईयां में हो रही गंभीर समस्याओं के निराकरण नहीं हो पाने के कारण हड़ताल पर बैठ गये है। इस संबंध में जिलाध्यक्ष राजस्व पटवारी संघ ने बताया कि प्रांतीय संघ द्वारा गत दिनों आनलाईन मीटिंग के बाद हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया है।
पटवारी संघ के अध्यक्ष संजय गबेल ने बताया कि विगत वर्षों से लंबित मांगों वेतन विसंगति दूर करने, सीनियरिटी के आधार पर पदोन्नति देने और विभागीय नियमित परीक्षा, संसाधन एवं भत्ता, स्टेशनरी भत्ता पर भी शासन को मनाने के लिए आंदोलन किया जा रहा है। जब तक हमारी मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक अपने आंदोलन में डटे रहने की बात कही है।
गौरतलब हो कि पटवारी संघ के प्रदेशव्यापी हड़ताल से सक्ती जिले में राजस्व विभाग का कामकाज पूरी तरह से ठप्प हो चुका है। जिससे ग्रामीण, किसान और छात्र काफी परेशान हो रहे हैं। सक्ती जिले के सभी तहसीलों में राजस्व के सभी काम पूरी तरह से ठप्प हो चुका है। कई तहसीलों में सन्नाटा पसरा हुआ है, पटवारी संघ के हड़ताल में जाने से सीमांकन, नामांतरण आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, बंटवारा आदि के काम पूरी तरह से प्रभावित हो गए है, जिस वजह से तहसील आ रहे ग्रामीणों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है, वही पटवारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती तब तक उनका अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा। वहीं पटवारियों की हड़ताल से सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र के किसानों, स्कूली छात्रों को परेशान होना पड़ रहा है. अपने जरूरी दस्तावेज बनाने के लिए किसान और स्कूली छात्र तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पटवारियों के नहीं होने से राजस्व का कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। बिना काम हुए ही ग्रामीणों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि पटवारियों की हड़ताल की जानकारी होने के बाद भी प्रशासन के बड़े अधिकारियों ने तहसीलों में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है, जिसके चलते दस्तखत से लेकर सीमांकन, नामांतरण, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं बन पा रहे हैं। वहीं छात्रों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है, नए शिक्षा सत्र के लिए स्कूलों में एडमिशन शुरू हो चुकी है और सभी जगह आय, जाति निवास मांगी जा रही है, लेकिन पटवारियों के हड़ताल की वजह से शासन के सभी योजनाओं से छात्र भी वंचित हो रहे हैं, लिहाजा ग्रामीणों ने प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। हालांकि तहसीलदारों का कहना है कि कोशिश की जा रही है कि ग्रामीण अंचलों से जरूरी दस्तावेज बनाने तहसील पहुंच रहे ग्रामीणों को यहां से निराश ना जाना पड़े लेकिन पटवारियों के हड़ताल पर जाने से जरूर तहसीलों में ग्रामीणों का सही समय पर काम नहीं हो पा रहा है, जिससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।




