छत्तीसगढ़

खाटूधाम पहुंचे श्याम प्रेमियों ने दशमी के दिन श्याम बाबा को किया निशान अर्पण

  •  श्याम बाबा के महाबलिदान ‘शीश दान’ के लिए उन्हें चढ़ाया जाता है निशान

  • धर्म की जीत के लिए भगवान श्रीकृष्ण को खाटू श्याम ने दान में दिया था अपना शीश

सक्ती/बिलासपुर/रायपुर/खाटूधाम। खाटू में लगने वाले 10 दिवसीय मेले के लिए शनिवार को सक्ती से रवाना श्याम बाबा के भक्त मां वैष्णो देवी के दर्शन उपरांत खाटूधाम पहुंचे, जहां खाटू श्याम के जयकारों के बीच उन्होंने दशमी के दिन बाबा श्याम का दर्शन किया। आसमान में उड़ता अबीर- गुलाल और खाटू नरेश के जयकारों के संग सैकड़ों हाथों में लहराते निशान, पवित्र अग्नि की ज्योति के साथ हर तरफ आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा और भक्तों ने खाटू धाम पहुंचकर श्याम बाबा को निशान अर्पण किया।

इस जत्थे में शामिल बंटी सराफ, नटवर अग्रवाल, पवन अग्रवाल, सावन अग्रवाल,आकाश अग्रवाल(गोलू), मोनू एमके, राहुल अग्रवाल, आकाश अग्रवाल, रवि अग्रवाल (लाला),आकाश अग्रवाल(बिरमित्रपुर) टालू अग्रवाल,शेरू अग्रवाल, रौनक अग्रवाल, दीपक गोयल, रिक्की अग्रवाल, रितेश अग्रवाल (चेपटी जी),आदर्श, बंटू, नीटू, सूरज, चीनू,अमन खेतान,चिराग,नितेश, दीपक(सिंगरोली), मेहुल(कान्हा) कोरबा, आशीष गोयल, दिनेश अग्रवाल (सिंगरोली) ने बाबा श्याम की लीला का बखान करते हुए कहा कि ऐसी मान्यता है कि इस निशान को चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सब कुछ कुशल मंगल रहता है. खाटू श्याम पर ध्वज चढ़ाने से पहले उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

श्याम प्रेमियों ने बताया कि निशान यात्रा एक तरह से पदयात्रा होती है, जिसमें भक्त अपने हाथों में श्रीश्याम ध्वज को पकड़कर खाटू श्याम मंदिर तक जाते हैं। इस यात्रा को श्रीश्याम ध्वज का निशान भी कहा जाता है। मुख्यत: यह यात्रा रींगस से खाटू श्याम मंदिर तक की जाती है, जो 18 किमी. की होती है।

ज्ञात रहे कि राजस्थान के सीकर जिले में खाटू गांव में श्याम बाबा का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। वहां पूरे विश्व से श्याम बाबा के अनुयायी फाल्गुन महीने में विशेष रूप से पहुंचते हैं। वहां 10 दिनों का फागुन उत्सव और मेले का आयोजन होता है। निशान का स्वरूप निशान मुख्यत: केसरी, नीला, सफेद, लाल रंग का झंडा/ध्वज होता है। इन ध्वजों पर श्याम बाबा और भगवान श्री कृष्ण के जयकारे और दर्शन के फोटो होते है। कुछ निशानों पर नारियल एवं मोरपंखी भी लगी होती है। इसके सिरे पर एक रस्सी बंधी होती है जिससे यह निशान हवा में लहराता है। वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत अनेक भक्त अब सोने-चांदी के भी निशान श्याम बाबा को अर्पित करने लगे हैं।

विदित रहे कि इस यात्रा के अंतर्गत भक्त अपनी श्रद्धा से अपने-अपने घर से भी शुरू करते हैं। ऐसा माना जाता है कि पैदल निशान यात्रा करके श्याम बाबा को निशान चढाने से बाबा शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं। सनातन संस्कृति में ध्वज को विजय का प्रतीक माना जाता है। श्री श्याम बाबा के महाबलिदान शीश दान के लिए उन्हें निशान चढ़ाया जाता है। जिसमे उन्होंने धर्म की जीत के लिए दान में अपना शीश ही भगवान श्री कृष्ण को दे दिया था।

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