सक्तीवासियों ने धूमधाम के साथ मनाया देवउठनी एकादशी का पर्व: बाजारों में गन्ना, सिंघाड़ा और शकरकंद की जमकर हुई खरीदारी

सक्ती। सक्ती शहर में आज देवउठनी एकादशी का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं, और इसके साथ ही शुभ कार्यों का शुभारंभ होता है। पर्व के दौरान महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया, वहीं सुबह से ही बाजारों में गन्ना, सिंघाड़ा और शकरकंद की जमकर खरीदारी भी हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना कर खुशहाली की कामना की।
शाम को घरों में हुई पूजा-अर्चना
शाम के समय घरों में विधि-विधान से देवोत्थान भगवान की आकृति बनाकर पूजा अर्चना की गई। इस दौरान घरों में उठो देव, जागो देव के जयकारे गूंज उठे। महिलाओं ने घर की रसोई में विभिन्न तरह के पूड़ी, पकवान बनाए। वहीं दूसरी ओर परिवार के लोग विभिन्न तरह की पूजन सामग्री का इंतजाम करते रहे। शाम को घर की बुजुर्ग महिलाओं ने आंगन में चौक बनाया। पिसे हुए चावल के घोल से देवी देवताओं की सुंदर आकृतियां बनाई। इसके बाद परंपरागत रीति रिवाज से लोकगीतों के माध्यम से सोए हुए देवताओं को जगाया गया। देवताओं को शकरकंदी, सिंघाड़े और गन्ना का भोग लगाया गया। देव उठानी एकादशी पर हर घर में देवी देवताओं की पूजा अर्चना कर घर परिवार में सुख समृद्धि की कामना की गई। देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है। इसी मान्यता के तहत जिले में प्रबोधिनी एकादशी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। विधि विधान से एकादशी की शाम को जगह-जगह तुलसी विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
ज्ञात रहे कि हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव प्रबोधिनी, देवउठनी और देवोत्थान एकादशी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार महीने तक विश्राम करने के बाद इस तिथि पर उठते हैं और सृष्टि का संचालन अपने कंधों पर एक फिर से संभाल लेते हैं। भगवान विष्णु आषाढ़ महीने की शुक्लपक्ष की देवशयनी एकादशी पर क्षीर सागर में सोने के लिए चले जाते हैं। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु और तुलसी का विवाह किया जाता है।
देवउठनी एकादशी से इन शुभ कार्यों की हो जाएगी शुरुआत
देवउठनी एकादशी से सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी. जिनमें शामिल हैं- विवाह, मुंडन, जनेऊ धारण और गृह प्रवेश आदि. देवउठनी एकादशी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि इससे चातुर्मास का समापन होता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार देवउठनी एकादशी पर रखे गए व्रत और भगवान विष्णु-माता लक्ष्मी की पूजा से दोगुना फल प्राप्त होता है।
नवंबर 2024 में विवाह मुहूर्त
12 नवंबर 2024 (मंगलवार), 13 नवंबर 2024 (बुधवार), 16 नवंबर 2024 (शनिवार), 17 नवंबर 2024 (रविवार), 18 नवंबर 2024 (सोमवार), 22 नवंबर 2024 (शुक्रवार), 23 नवंबर 2024 (शनिवार), 25 नवंबर 2024 (सोमवार), 26 नवंबर 2024 (मंगलवार), 28 नवंबर 2024 (गुरुवार), 29 नवंबर 2024 (शुक्रवार)
दिसंबर 2024 में विवाह मुहूर्त
4 दिसंबर 2024 (बुधवार), 5 दिसंबर 2024 (गुरुवार), 9 दिसंबर 2024 (सोमवार), 10 दिसंबर 2024 (मंगलवार), 14 दिसंबर 2024 (शनिवार), 15 दिसंबर 2024 (रविवार)




