
सक्ती। शहर के नाका चौक में संविधान दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित कर संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर जीपी बंजारे, डीके कुर्रे, अरूण सोनवानी, श्यामसुंदर बंजारे, बहादुर गढ़ेवाल, चिंटू भारद्वाज, श्री निराला, विनय खुंटे, संतोष अनंत समेत शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
कार्यक्रम के दौरान जनसमूह को संबोधित करते हुए बताया गया कि हमारा संविधान भारत की सदियों पुरानी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं का आइना है। यह संविधान हमारे सदियों के संघर्ष, अनुभव और उपलब्धियों का प्रतिफल है। हमारे संविधान निर्माताओं ने जहां पर मौलिक अधिकारों की बात लिखी है। संविधान में ऐसे अनेक चित्र और संकेत हैं जिनके माध्यम से संविधान निर्माताओं ने इंगित किया है कि हमें भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के साथ लोकतंत्र को आगे बढ़ाना है। यह भी हमारे संविधान की एक बड़ी विशेषता है कि इसमें परिवर्तनशील समय के अनुरूप आवश्यकता पडऩे पर संशोधन का भी प्रावधान है। हमारे संविधान निर्माताओं ने देश पर अपनी इच्छाओं और विचारों को लादा नहीं, बल्कि अपनी दूरदर्शिता से भावी पीढ़ी के लिए यह गुंजाइश छोड़ी कि वह अपने समय की परिस्थितियों, अपने समय के ज्ञान, अपने समय की आवश्यकताओं के अनुसार इसमें संशोधन कर सकें। संविधान सभा ने दो साल 11 महीने 18 दिन में संविधान का निर्माण किया। भारत का यह संविधान पूरे विश्व के लिए आदर्श है। संविधान केवल किताब ही नहीं, अपितु लोकतंत्र के जीवन का दर्शन है। भारत के संविधान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए संविधान दिवस मनाया जा रहा है। लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए देश के सभी लोगों को संविधान में दिए गए कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना होगा।




